असम के राज्यपाल के बेमतलब के बोल

हमारे देश में राज्यपाल का एक संवैधानिक पद होता जो हर राज्य में है सार्वजनिक स्थानों पर उसकी टिप्पणी सरकार का मत माना जाता है ऐसे में इस पद के द्वारा सेना का मनोबल गिराये जाने वाली बात कही जाये तो इस पद की मर्यादा को चोट पहुँचती है ।

असम में वर्तमान राज्यपाल बनवारी लाल पद की मर्यादा को शर्मिंदा करने वाली टिप्पणी की भारत चीन से डरता है, हम चीन से कमजोर हैं इसलिये हम उससे युद्ध टालने की कोशिश करते हैं । यह टिप्पणी इसलिये और अधिक मायने रखती है क्योंकि अभी कल ही चीन ने भारत को १९६२ का युद्ध याद रखने की धमकी दी और कहा था भारत संभल कर रहे ।

इन परिस्थितियों से क्या सेना का मनोबल नहीं टूटेगा, सोचने वाली बात यह है जब वियतनाम, कांगो एवं भूटान (जो स्वयं भारत पर आश्रित है) को डर नहीं लगता सेना हमेशा तैयार है चाहें जितनी कम शक्ति के साथ हो पर है तो हमारे यहाँ एक राज्यपाल ऐसे शब्द कैसे प्रयोग कर सकता है!!!

असम के राज्यपाल के कायरता पूर्ण टिप्पणी देने से कि भारत चीन से डरता है इससे चीन के हौसले वृद्धि हुई है । इस बड़बोले बयान को राज्यपाल ने यह बयान कोई आम सभा में नहीं बल्कि उत्तर पूर्व के पुलिस बल की २४ वीं कांफ्रेंस में दिया है ।

इसका फायदा उठा चीन ने मात्र दो घंटे में चेतावनी जारी की भारत अगर कोई बातचीत चाहता है तो उसे सिक्किम के डोकमा क्षेत्र से अपनी सेना हटानी पड़ेगी वहाँ भारतीय सेना ने घुसपैठ की है, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने साफ तौर पर यह कहा ।

जबसे मोदी सरकार आयी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति हास्यास्पद ही रही – हांगकांग की बिना किसी वीजा या प्रपत्र के केवल पासपोर्ट द्वारा एंट्री खत्म किया जाना, ट्रंप से मिलने के लिये बहुत प्रयास करना और वहाँ पर अपनी ही बातों पर अटल न रह सकना (सरकार का कहना है आतंकवाद का धर्म नहीं पर ट्रंप ने भारत को इस्लामिक आतंकवाद से ग्रस्त कहा मोदी चुप रहे) अन्य कई मामलों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की खिल्ली उड़ी है, राज्यपाल साहब का कहना है अब हम चीन से डरते हैं जब चीन ने सिक्किम से एवं भूटान की सुरक्षा से भारत को हटने का बयान दिया है ।

मानसरोवर पर दो मार्ग खुलवाने का दंभ भरने वाली भाजपा मार्ग बंद होने पर यूटर्न ले चुकी है, यहाँ तक प्रधानमंत्री जिन्होंने चुनाव पूर्व चीन को लाल आँखे दिखाने की धमकी दी हद में रहने की धमकी दी वो चुनाव बाद भीगी बिल्ली बन चुके है, वो लाल आँखें अब आँख मिला कर भी कुछ नहीं कर पा रही है ।

अब छोटे उद्योगों को उत्पादकों को तबाह करने के लिये बंटवारे की जश्न की तर्ज पर बस एक और जश्न संसद में आधी रात को मनाया जा रहा है । हमको यह बातें ध्यान रखनी होगी चीन की निगाह पूरे पूर्वोत्तर पर है और राज्यपाल उसी के एक प्रांत से है ।

हर स्तर पर असफल सरकार विदेश नीति से लेकर गृह नीति तक

१. हांगकांग के द्वारा वीजा फ्री एंट्री बंद
२. नेपाल द्वारा भारत अविश्वास जताना, नेपाली प्रधानमंत्री के हिंदूराष्ट्र के वचन से पीछे हटना
३. विदेशों में भारतीय सुरक्षित नहीं नस्लीय हमलों के शिकार
४. काला धन की फूटी कौड़ी भी नहीं
५. इटली के कातिल बेपरवाह आराम से स्वछंद विचरण करते हुये
६. चीन ने मानसरोवर यात्रा बंद करायी

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